Sunday, 7 April 2013

know your investment:bonus share by Anmol Bihariya


  corporate
      आमतौर पर कंपनिया अपना सारा मुनाफा शेयर होल्डरों में लाभांश के बाटने  की जगह उसका बड़ा हिस्सा  अपने संचित कोष या रिज़र्व में डाल देती है, इस रिज़र्व का उपयोग भविष्य में अप्रत्याशित संकटो तथा कठिनाईओ से निपटने के लिए तथा कारोबार को बढ़ने के लिए किया जाता है, चुकि आने वाली समस्या बताकर तो आती नहीं इसलिए कंपनी एक रिज़र्व बनाकर रखती हे जो की तुरंत नकद में परिवर्तित होने की योग्यता रखता है।इसका कुछ हिस्सा नियमित रूप से कारोबार बढ़ोतरी में किया जाता है।सभी मुनाफा बनाने वाली कंपनिया धीरे -धीरे  बड़े कोष निर्मित कर लेती है।साथ ही ऐसी कंपनी का कारोबार भी विकसित होता है, बिक्री और संपत्ति(चल और अचल ) में वृद्धि होती है।ऐसे में कई कंपनियों में एक समस्या आती है की उनकी पूजी जो कारोबार में लगी है उसकी तुलना में निष्क्रिय पड़ी पूजी का उप्योद न हो पा  रहा है तथा कारोबार में भी अभी किसी निवेश की आवश्यकता नहीं है, चुकी यह पूंजी जो की रिज़र्व में पड़ी है उस पर मालिको का ही हक होता है, चुकी सभी शेयरधारी चाहे वह बड़ा हो या छोटा उनको बोनस के रूप में पूंजी दे देती है। शेयर होल्डर  के पास जितने शेयर होते है उसके आधार पर जो अनुपात निश्चित होता है उसे ये शेयर मुफ्त में दे दिए जाते है तथा निष्क्रिय पूंजी , सक्रिय पूंजी में बदल जाते है।

     यह मूलतः कंपनी के खाते का ही हिसाब होता है जिसमे से पैसे निकल कर बोनस बनाये जाते है अर्थात एक प्रकार से रिज़र्व से पैसा निकल कर के इक्विटी कैपिटल में परिवर्तित कर दिया जाता है,तथा कंपनी का बाज़ार में पूंजीकरण के आधार पर भर बढ़ जाता है।इस प्रकार कंपनी बोनस शेयर जारी करके अपने कंपनी में हिस्सेदारो में बिना बढोतरी किये नई पूंजी का उपयोग कर लेती है।
  
    बोनस शेयर के मुफ्त में जारी होने पर बाजारों मैं शेयर के भाव गिरना आम बात है।पर निवेशक परेशान न हो क्योकि शेयरो के गिरने पर जितना नुकसान होता है उससे कंही अधिक फायेदा बोनस शेयर के मिलने पर हो जाता है और निवेशक की कंपनी मैं हिस्सेदारी भी बढ़ जाती है,उदाहरण के रूप में मान लीजिये आपके पास एक कंपनी 'अ' के शेयर है जिनकी संख्या 100 है  अब कंपनी यदि 1:1 के अनुपात में बोनस  शेयर जारी करती  है तो निवेशक के पास बिना पैसा लगाये 200 शेयर आ जायेंगे, मान लीजिये यदि बोनस के पहले शेयर का भाव 50 रूपये था तो आपके पास 50 रूपये के 100 शेयर थे जिनका मूल्य 5000 रूपये था अब बोनस के बाद आपके पास 200 शेयर हो गए है माना की मूल्य 26  रूपये तक भी गिर गया तो 26 रूपये के  200 अर्थात 5200 रूपये के शेयर हो गए, आपके शेयर भी डबल हो गए और 200 रूपये अर्थात 4% मुनाफा भी मिल गया, पूंजी में वृद्धि हो गयी। जो कंपनी भविष्य में फायेदा न कमा सकती हो वो बोनस शेयर जरी ही नहीं करेगी इसके कारण बाज़ार में उस कंपनी को लेकर सकारात्मक नजरिया बन जाता है और  शेयर कुछ समय तक बढ़ना जारी रख सकता है।निवेशक को बोनस मिलने के तुरंत बाद शेयर बेचने नहीं चाहिए।

Thursday, 4 April 2013

know company for healthy investment : e-clerx services ltd.




        e-clerx was founded in 2000, e-clerx have knowledge process outsourcing business.This company providing middle and back office support  over 500 companies.Company has a headquarter in mumbai and have five delivery centre across India.Company has global client base in Financial services,broadband, e-commerce, retail,high tech works,software, media, and travel companies.
company was listed in india since 2007 on BSE and NSE with  BSE:532927 and NSE: ecler codes.company has 67% business in USA, 21% in Europe,8% in Asia and 5% in UK. Company have Data analysis,audits,services solutions, data processes based business and have many outsourcing BPO in many countries.
        e-clerx showing good sales data,EPS and BVPS growth sice last ten years,company have fairly consistent level of margins.In cash flows statement e-clerx showing strong operating cash flows, as we know strong operating cash flows have very important role in any company growth.One very important key is e-clerx is debt free company.In last few year e-clerx increase there working capital days.Working capital days have most important role in any BPO and out sourcing company.The 10 year ROIC & ROE averages nearly 172%.Company have no corporate governance issue, from year 2006, e-clerx showing sharp increase in operating profit margins and net profit margins and low provisions for taxes.Net sales increasing 40% year by year and 5 year CAGR nearly 40%.Over 6000+ employees working in e-clerx.


Report Card
PE Ratios
11.67
EPS (Rs.)
54.14
Sales (Rs. Cr)
145.84
Face Value (Rs.)
10
Net Profit
Margin (%)

31.79
Last Bonus
1:2
Last Dividend(%)
175
Return on
Average Equity

46.94







   




Mutual Funds Invested in e-clerx 
ICICI Prudential Services Industries Fund - Direct Plan - Growth

ICICI Prudential Services Industries Fund - Growth

ICICI Prudential Services Industries Fund - Direct Plan - Dividend

ICICI Prudential Services Industries Fund - Dividend
Tata Mid Cap Growth Fund - Direct Plan - Growth




    From the view of investment in this company looking very attractive with it's growth prospects.e-clerx trading with 1880 Crore market capital,  13.12 P/E, 12.06 P/C,Face value of 10rs each share, 48 EPS,Dividend yield of 3% per year. Average P/E Ratio of peer group companies of same sector is 13 and e-elerx have also same  13, EPS(TTM) is 48 showing good earning capacity of company. The valuations of company is looking fair for long term investment purpose. Promoters( including Foreign and Indian) have more then 53% share holding in company and FII have 35 % holding , public have  only 9.13% holding in e-clerx.This  fundamental analyses looking very good for a company, e-clerx looking  good to invest for long term purpose.

Wednesday, 3 April 2013

Fundamental analysis of bonds : by Anmol Bihariya



बांड क्या है और उनकी बुनियादी विशेषताए 

    बांड की बुनियादी विशेषताए परिपक्वता, मूलधन, और ब्याज हैं।परिपक्वता, मूलधन, और


 ब्याज के मध्य के संबंध किये गए मूलधन के निवेश को प्रभावित कर रहे हैं तथा उसका मूल्य


 बढा रहे है। सामान्यतः बांड को सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है।सुरक्षित प्रकृति वाले 


निवेशक प्रायः बांड्स में निवेश करते है,बांड का लाभ अर्जित करने का प्रतिशत कुछ निश्चित रिटर्न  


देने  वालो की तुलना में आधिक होता है।आइये जानते है बांडस में निवेश कैसे किया जाये। बांड


 की कीमतों में उतार - चढ़ाव परिपक्वता और कूपन पर निर्भर करता है।कूपन बांड जारी करते 


समय जारी होते है जिन पर निश्चित रिटर्न का प्रतिशत अंकित होता है। निवेश से पहले कृपया


 उसका कूपन रेट पता कर ले।



बांड की विशेषताएं


      स्वामित्व का प्रकार, मूलधन, परिपक्वता और कूपन का मूल्य बांड की आवश्यक आंतरिक 


विशेषताएं है। बांड की कूपन आय से पता चलता है कि बांड निवेशक बांड की  होल्डिंग अवधि 


तक कितना रिटर्न प्राप्त करता है। यह नामांकित उपज या रिटर्न  या कूपन द्वारा  ब्याज आय


 के रूप में कहलाता है।


परिपक्वता अवधि वर्ष निर्दिष्ट करता है की  और बांड किस  तारीख में परिपक्व होगा और 


मूलधन वापस किया जायेगा अर्थात निश्चित रिटर्न देने का अनुबंध समाप्त हो जायेगा।बाज़ार में


 विभिन्न परिपक्वता वाले बांड उपलब्ध है . आम बांड की बंधन अवधि होती है जिसमे कि 


परिपक्वता की केवल एक ही तारीख होती है। वैकल्पिक  दायित्व के बांड में  जारी तथा 


परिपक्वता की तिथियों की एक श्रृंखला होती है जो एक के बाद एक आती जाती हे और बांड 


परिपक्व होते जाते है,शायद यह बीस या पच्चीस होती है। सीरियल बांड विभिन्न सरकारी 

पालिकाओ  द्वारा जारी किए जाते हैं।



बांड जारी करने के प्रकार 

1 .सुरक्षित बांड निर्दिष्ट  संपत्ति पर कानूनी दावा करने हेतु समर्थित होते हैं।अर्थात मूलधन या 


ब्याज न चुकाने पर दावा करने वाला बांड जारीकर्ता की संपत्ति को बेच कर हिसाब चुकता कर 


सकता है।


2 .असुरक्षित बांड मे केवल वादा द्वारा बांड समर्थित होता है इसमें जारीकर्ता की संपत्ति को 


 दावेदार बेच कर हिसाब चुकता नहीं कर सकता है।

3.डिबेंचर ऋणकर्ता की ईमानदारी से समर्थित होते है।

4. अधीनस्थ डिबेंचर जारीकर्ता या  ऋणकर्ता की संपत्ति और आय पर ऋणदाता को दावा करवा सकते है।


5. आय बांड कंपनियों द्वारा इस क्षेत्र में उपयोग नहीं किये जाते है, वे प्रसिद्ध सरकारी निगमों 


द्वारा उपयोग में लाये जाते है,और इन्हें राजस्व बांड के रूप में भेजा जाता है।

6. वापसी वाले बांड्स ऋणदाता को रिटायर होने पर धन की पेशकश करते हैं।



बांड की रेटिंग

प्रमुख रेटिंग एजेंसिया जेसे केयर रेटिंग, क्रिसिल,इक्रा,मूडीस,फिच, फेल्प्स, इंडिया रेटिंग, रेटिंग देकर 


डिफॉल्ट की संभावनाओं को निर्धारित करने के रूप में के रूप में अपनी जांच  को रेटिंग के रूप में 

प्रदर्शित करती है की इस बांड के  बारे में उनकी राय किया है, क्या यह सुरक्षित है, रेटिंग के 

माध्यम से बाजार को सूचित करने के उद्देश्य से रेटिंग कंपनी  के माद्यम से ये सूचनाये जरी 

की जाती है निवेश करने से पहले बांड की रेटिंग देख ले की वह सुरक्षित है या नहीं और विशिष्ट

 मुद्दों की जांच कर ले . प्रमुख बांड रेटिंग निम्न है।

Moody's
S&P
Fitch

Long-term
Short-term
Long-term
Short-term
Long-term
Short-term

Aaa
P-1
AAA
A-1+
AAA
F1+
Prime
Aa1
AA+
AA+
High grade
Aa2
AA
AA
Aa3
AA-
AA-
A1
A+
A-1
A+
F1
Upper medium grade
A2
A
A
A3
P-2
A-
A-2
A-
F2
Baa1
BBB+
BBB+
Lower medium grade
Baa2
P-3
BBB
A-3
BBB
F3
Baa3
BBB-
BBB-
Ba1
Not prime
BB+
B
BB+
B
Non-investment grade
speculative
Ba2
BB
BB
Ba3
BB-
BB-
B1
B+
B+
Highly speculative
B2
B
B
B3
B-
B-
Caa1
CCC+
C
CCC
C
Substantial risks
Caa2
CCC
Extremely speculative
Caa3
CCC-
Default imminent with little
prospect for recovery
Ca
CC
C
C
D
/
DDD
/
In default
/
DD
/
D
 छवि स्त्रोत : http://en.wikipedia.org/wiki/Bond_credit_rating wikipedia

जोखिम का प्रबंधन कैसे करें


बांड में निवेश के जोखिम को कम करने के लिए दो तरीके निम्नलिखित है:-


1. बांड फंड में निवेश -    इसमें कई निवेशकों से पैसे लेकर एक बड़ा फण्ड बनाया जाता है फिर 


अनुभवी  प्रबंधक पेशेवरों द्वारा निवेश किया जाता  है और यह बांड  विभिन्न  प्रकार के बांड्स


के  मिश्रण से बना होता है। क्योंकि निवेश में पैसे कई बांड में फैल रहे हैं, यह आम तौर पर 


व्यक्तिगत बांड में निवेश करने की तुलना में कम जोखिम भरा है।खरीद करने के लिए या फंड


 बेचने के लिए  कुछ कमीशन तथा प्रशासनिक शुल्क का भुगतान करना होगा  

2.बंधन सीढ़ी बनाना - विविधता के लिए सबसे अच्छा तरीका , विभिन्न परिपक्वता की तारीख के

 साथ बांड की खरीद है.

बांडों में निवेश करने से पहले, अगर आप सभी इस लेख में दी गई जानकारी का पालन करें तो 


आप निश्चित रूप से अपने निवेश के माध्यम से आपको अच्छा मुनाफा मिल जाएगा