आमतौर पर कंपनिया अपना सारा मुनाफा शेयर होल्डरों में लाभांश के बाटने की जगह उसका बड़ा हिस्सा अपने संचित कोष या रिज़र्व में डाल देती है, इस रिज़र्व का उपयोग भविष्य में अप्रत्याशित संकटो तथा कठिनाईओ से निपटने के लिए तथा कारोबार को बढ़ने के लिए किया जाता है, चुकि आने वाली समस्या बताकर तो आती नहीं इसलिए कंपनी एक रिज़र्व बनाकर रखती हे जो की तुरंत नकद में परिवर्तित होने की योग्यता रखता है।इसका कुछ हिस्सा नियमित रूप से कारोबार बढ़ोतरी में किया जाता है।सभी मुनाफा बनाने वाली कंपनिया धीरे -धीरे बड़े कोष निर्मित कर लेती है।साथ ही ऐसी कंपनी का कारोबार भी विकसित होता है, बिक्री और संपत्ति(चल और अचल ) में वृद्धि होती है।ऐसे में कई कंपनियों में एक समस्या आती है की उनकी पूजी जो कारोबार में लगी है उसकी तुलना में निष्क्रिय पड़ी पूजी का उप्योद न हो पा रहा है तथा कारोबार में भी अभी किसी निवेश की आवश्यकता नहीं है, चुकी यह पूंजी जो की रिज़र्व में पड़ी है उस पर मालिको का ही हक होता है, चुकी सभी शेयरधारी चाहे वह बड़ा हो या छोटा उनको बोनस के रूप में पूंजी दे देती है। शेयर होल्डर के पास जितने शेयर होते है उसके आधार पर जो अनुपात निश्चित होता है उसे ये शेयर मुफ्त में दे दिए जाते है तथा निष्क्रिय पूंजी , सक्रिय पूंजी में बदल जाते है।
यह मूलतः कंपनी के खाते का ही हिसाब होता है जिसमे से पैसे निकल कर बोनस बनाये जाते है अर्थात एक प्रकार से रिज़र्व से पैसा निकल कर के इक्विटी कैपिटल में परिवर्तित कर दिया जाता है,तथा कंपनी का बाज़ार में पूंजीकरण के आधार पर भर बढ़ जाता है।इस प्रकार कंपनी बोनस शेयर जारी करके अपने कंपनी में हिस्सेदारो में बिना बढोतरी किये नई पूंजी का उपयोग कर लेती है।
बोनस शेयर के मुफ्त में जारी होने पर बाजारों मैं शेयर के भाव गिरना आम बात है।पर निवेशक परेशान न हो क्योकि शेयरो के गिरने पर जितना नुकसान होता है उससे कंही अधिक फायेदा बोनस शेयर के मिलने पर हो जाता है और निवेशक की कंपनी मैं हिस्सेदारी भी बढ़ जाती है,उदाहरण के रूप में मान लीजिये आपके पास एक कंपनी 'अ' के शेयर है जिनकी संख्या 100 है अब कंपनी यदि 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करती है तो निवेशक के पास बिना पैसा लगाये 200 शेयर आ जायेंगे, मान लीजिये यदि बोनस के पहले शेयर का भाव 50 रूपये था तो आपके पास 50 रूपये के 100 शेयर थे जिनका मूल्य 5000 रूपये था अब बोनस के बाद आपके पास 200 शेयर हो गए है माना की मूल्य 26 रूपये तक भी गिर गया तो 26 रूपये के 200 अर्थात 5200 रूपये के शेयर हो गए, आपके शेयर भी डबल हो गए और 200 रूपये अर्थात 4% मुनाफा भी मिल गया, पूंजी में वृद्धि हो गयी। जो कंपनी भविष्य में फायेदा न कमा सकती हो वो बोनस शेयर जरी ही नहीं करेगी इसके कारण बाज़ार में उस कंपनी को लेकर सकारात्मक नजरिया बन जाता है और शेयर कुछ समय तक बढ़ना जारी रख सकता है।निवेशक को बोनस मिलने के तुरंत बाद शेयर बेचने नहीं चाहिए।
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